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التين

At-Tin

The Fig

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ अत्यंत कृपाशील, परम दयालु अल्लाह के नाम से
आयतें 8
पारा 30
पृष्ठ 597
प्रकार मक्की
अवतरण क्रम 28
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आयत: 1 / 8
1

وَٱلتِّينِ وَٱلزَّيْتُونِ

wal-tīni wal-zaytūni

क़सम है अंजीर की! तथा ज़ैतून की!

2

وَطُورِ سِينِينَ

waṭūri sīnīna

एवं "तूरे सीनीन" की क़सम!

3

وَهَـٰذَا ٱلْبَلَدِ ٱلْأَمِينِ

wahādhā l-baladi l-amīni

और इस शान्ति वाले नगर की क़सम!

4

لَقَدْ خَلَقْنَا ٱلْإِنسَـٰنَ فِىٓ أَحْسَنِ تَقْوِيمٍۢ

laqad khalaqnā l-insāna fī aḥsani taqwīmin

निःसंदेह हमने इनसान को सबसे अच्छी संरचना में पैदा किया है।

5

ثُمَّ رَدَدْنَـٰهُ أَسْفَلَ سَـٰفِلِينَ

thumma radadnāhu asfala sāfilīna

फिर हमने उसे सबसे नीची हालत की ओर लौटा दिया।

6

إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ فَلَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍۢ

illā alladhīna āmanū waʿamilū l-ṣāliḥāti falahum ajrun ghayru mamnūnin

परंतु जो लोग ईमान लाए तथा उन्होंने सत्कर्म किए, उनके लिए समाप्त न होने वाला बदला है।

7

فَمَا يُكَذِّبُكَ بَعْدُ بِٱلدِّينِ

famā yukadhibuka baʿdu bil-dīni

फिर (ऐ मनुष्य) तुझे कौन-सी चीज़ बदले (के दिन) को झुठलाने पर आमादा करती है?

8

أَلَيْسَ ٱللَّهُ بِأَحْكَمِ ٱلْحَـٰكِمِينَ

alaysa l-lahu bi-aḥkami l-ḥākimīna

क्या अल्लाह सब हाकिमों से बड़ा हाकिम नहीं है?

इस सूरत के बारे में