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18 duas

1

اللَّهُ أَكْبَرُ، اللَّهُ أَكْبَرُ، اللَّهُ أَكْبَرُ، سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَنَا هَذَا وَمَا كُ...

अल्लाह सबसे बड़ा है। पाक है वो जिसने इसे हमारे अधीन किया, हम इसे काबू में नहीं कर सकते थे। और हम अपने रब की तरफ लौटने वा...

Muslim 1342, Abu Dawud 2599
2

اللَّهُمَّ إِنَّا نَسْأَلُكَ فِي سَفَرِنَا هَذَا الْبِرَّ وَالتَّقْوَى، وَمِنَ الْعَمَلِ مَا تَرْضَى...

हे अल्लाह! हम इस सफर में तुझसे नेकी और तक़वा मांगते हैं और ऐसे अमल जो तुझे पसंद हों। हे अल्लाह! हमारे इस सफर को हम पर आस...

Muslim 1342
3

آيِبُونَ تَائِبُونَ عَابِدُونَ لِرَبِّنَا حَامِدُونَ

हम लौटने वाले, तौबा करने वाले, इबादत करने वाले और अपने रब की तारीफ करने वाले हैं।...

Bukhari 1797, Muslim 1342
4

اللَّهُمَّ رَبَّ السَّمَاوَاتِ السَّبْعِ وَمَا أَظْلَلْنَ، وَرَبَّ الْأَرَضِينَ السَّبْعِ وَمَا أَقْ...

हे अल्लाह! सात आसमानों के रब और जिन पर उन्होंने छाया किया, सात ज़मीनों के रब और जिन्हें उन्होंने उठाया, शैतानों के रब और...

Hakim in Al-Mustadrak, Ibn Hibban
5

أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ

मैं अल्लाह के पूर्ण कलिमात की पनाह चाहता हूं उसकी मख़लूक़ के शर से।...

Muslim 2708
6

بِسْمِ اللَّهِ، تَوَكَّلْتُ عَلَى اللَّهِ، وَلَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ

अल्लाह के नाम से, मैंने अल्लाह पर भरोसा किया, और कोई ताकत और ताक़त नहीं सिवाय अल्लाह के।...

Abu Dawud 5095, Tirmidhi 3426
7

اللَّهُمَّ إِنَّا نَجْعَلُكَ فِي نُحُورِهِمْ، وَنَعُوذُ بِكَ مِنْ شُرُورِهِمْ

हे अल्लाह! हम तुझे उनके सामने रखते हैं और उनके शर से तेरी पनाह चाहते हैं।...

Abu Dawud 1537
8

سُبْحَانَ اللَّهِ

अल्लाह पाक है...

Bukhari 2993
9

اللَّهُ أَكْبَرُ

अल्लाह सबसे बड़ा है...

Bukhari 2993
10

اللَّهُمَّ بَارِكْ لَهُمْ فِيمَا رَزَقْتَهُمْ، وَاغْفِرْ لَهُمْ وَارْحَمْهُمْ

हे अल्लाह! जो तूने उन्हें दिया है उसमें बरकत दे, उन्हें माफ कर और उन पर रहम कर।...

Muslim 2042
11

لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ الْعَظِيمُ الْحَلِيمُ، لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ رَبُّ الْعَرْشِ الْعَظِ...

अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं जो महान और सहनशील है। अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं जो महान अर्श का रब है। अल्लाह के सिवा ...

Bukhari 6346, Muslim 2730
12

أَسْتَوْدِعُكُمُ اللَّهَ الَّذِي لَا تَضِيعُ وَدَائِعُهُ

मैं तुम्हें अल्लाह के हवाले करता हूं जिसकी अमानतें ज़ाए नहीं होतीं।...

Ahmad 2/403, Ibn Majah 2825
13

أَسْتَوْدِعُ اللَّهَ دِينَكَ وَأَمَانَتَكَ وَخَوَاتِيمَ عَمَلِكَ

मैं तुम्हारे दीन, अमानत और अमल के अंजाम को अल्लाह के हवाले करता हूं।...

Tirmidhi 3443, Abu Dawud 2600
14

زَوَّدَكَ اللَّهُ التَّقْوَى، وَغَفَرَ ذَنْبَكَ، وَيَسَّرَ لَكَ الْخَيْرَ حَيْثُمَا كُنْتَ

अल्लाह तुझे तक़वा का रास्ता दे, तेरा गुनाह माफ करे और जहां भी हो तेरे लिए भलाई आसान करे।...

Tirmidhi 3444
15

اللَّهُمَّ اطْوِ لَنَا الْأَرْضَ، وَهَوِّنْ عَلَيْنَا السَّفَرَ

हे अल्लाह! हमारे लिए ज़मीन को समेट दे और हमारा सफर आसान कर।...

Tabarani in Al-Kabir
16

تَوْبًا تَوْبًا لِرَبِّنَا أَوْبًا، لَا يُغَادِرُ عَلَيْنَا حَوْبًا

तौबा करते हुए, अपने रब की तरफ लौटते हुए, हम पर कोई गुनाह न छोड़ते हुए।...

Ahmad 1/236
17

اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَافِيَةَ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ

हे अल्लाह! मैं तुझसे दुनिया और आखिरत में आफियत मांगता हूं।...

Ibn Majah 3871
18

اللَّهُمَّ إِنَّا نَسْأَلُكَ فِي سَفَرِنَا هَذَا الْبِرَّ وَالتَّقْوَى، وَمِنَ الْعَمَلِ مَا تَرْضَى...

हे अल्लाह! हम इस सफर में तुझसे नेकी और तक़वा मांगते हैं और ऐसे अमल जो तुझे पसंद हों। हे अल्लाह! हमारे इस सफर को हम पर आस...

Muslim 1342