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الشمس

Ash-Shams

The Sun

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ अत्यंत कृपाशील, परम दयालु अल्लाह के नाम से
आयतें 15
पारा 30
पृष्ठ 595
प्रकार मक्की
अवतरण क्रम 26
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आयत: 1 / 15
1

وَٱلشَّمْسِ وَضُحَىٰهَا

wal-shamsi waḍuḥāhā

सूरज की क़सम! तथा उसके ऊपर चढ़ने के समय की क़सम!

2

وَٱلْقَمَرِ إِذَا تَلَىٰهَا

wal-qamari idhā talāhā

तथा चाँद की (क़सम), जब वह सूरज के पीछे आए।

3

وَٱلنَّهَارِ إِذَا جَلَّىٰهَا

wal-nahāri idhā jallāhā

और दिन की (क़सम), जब वह उस (सूरज) को प्रकट कर दे!

4

وَٱلَّيْلِ إِذَا يَغْشَىٰهَا

wa-al-layli idhā yaghshāhā

और रात की (क़सम), जब वह उस (सूरज) को ढाँप ले।

5

وَٱلسَّمَآءِ وَمَا بَنَىٰهَا

wal-samāi wamā banāhā

और आकाश की तथा उसके निर्माण की (क़सम)।

6

وَٱلْأَرْضِ وَمَا طَحَىٰهَا

wal-arḍi wamā ṭaḥāhā

और धरती की तथा उसे बिछाने की (क़सम!)1

7

وَنَفْسٍۢ وَمَا سَوَّىٰهَا

wanafsin wamā sawwāhā

और आत्मा की तथा उसके ठीक-ठाक बनाने की (क़सम)।

8

فَأَلْهَمَهَا فُجُورَهَا وَتَقْوَىٰهَا

fa-alhamahā fujūrahā wataqwāhā

फिर उसके दिल में उसकी बुराई और उसकी परहेज़गारी (की समझ) डाल दी।1

9

قَدْ أَفْلَحَ مَن زَكَّىٰهَا

qad aflaḥa man zakkāhā

निश्चय वह सफल हो गया, जिसने उसे पवित्र कर लिया।

10

وَقَدْ خَابَ مَن دَسَّىٰهَا

waqad khāba man dassāhā

तथा निश्चय वह विफल हो गया, जिसने उसे (पापों में) दबा दिया।1

11

كَذَّبَتْ ثَمُودُ بِطَغْوَىٰهَآ

kadhabat thamūdu biṭaghwāhā

समूद (की जाति) ने अपनी सरकशी के कारण झुठलाया।

12

إِذِ ٱنۢبَعَثَ أَشْقَىٰهَا

idhi inbaʿatha ashqāhā

जब उसका सबसे दुष्ट व्यक्ति उठ खड़ा हुआ।

13

فَقَالَ لَهُمْ رَسُولُ ٱللَّهِ نَاقَةَ ٱللَّهِ وَسُقْيَـٰهَا

faqāla lahum rasūlu l-lahi nāqata l-lahi wasuq'yāhā

तो अल्लाह के रसूल ने उनसे कहा : अल्लाह की ऊँटनी और उसके पीने की बारी का ध्यान रखो।

14

فَكَذَّبُوهُ فَعَقَرُوهَا فَدَمْدَمَ عَلَيْهِمْ رَبُّهُم بِذَنۢبِهِمْ فَسَوَّىٰهَا

fakadhabūhu faʿaqarūhā fadamdama ʿalayhim rabbuhum bidhanbihim fasawwāhā

परंतु उन्होंने उसे झुठलाया और उस (ऊँटनी) की कूँचें काट दीं, तो उनके पालनहार ने उनके गुनाह के कारण उन्हें पीस कर विनष्ट कर दिया और उन्हें मटियामेट कर दिया।

15

وَلَا يَخَافُ عُقْبَـٰهَا

walā yakhāfu ʿuq'bāhā

और वह उसके परिणाम से नहीं डरता।1

इस सूरत के बारे में