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النصر

An-Nasr

The Divine Support

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ अत्यंत कृपाशील, परम दयालु अल्लाह के नाम से
आयतें 3
पारा 30
पृष्ठ 603
प्रकार मदनी
अवतरण क्रम 114
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आयत: 1 / 3
1

إِذَا جَآءَ نَصْرُ ٱللَّهِ وَٱلْفَتْحُ

idhā jāa naṣru l-lahi wal-fatḥu

(ऐ नबी!) जब अल्लाह की सहायता एवं विजय आ जाए।

2

وَرَأَيْتَ ٱلنَّاسَ يَدْخُلُونَ فِى دِينِ ٱللَّهِ أَفْوَاجًۭا

wara-ayta l-nāsa yadkhulūna fī dīni l-lahi afwājan

और आप लोगों को देखें कि वे अल्लाह के धर्म में दल के दल प्रवेश कर रहे हैं।1

3

فَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ وَٱسْتَغْفِرْهُ ۚ إِنَّهُۥ كَانَ تَوَّابًۢا

fasabbiḥ biḥamdi rabbika wa-is'taghfir'hu innahu kāna tawwāban

तो आप अपने पालनहार की प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता का वर्णन करें और उससे क्षमा माँगें, निःसंदेह वह बहुत तौबा क़बूल करने वाला है।1

इस सूरत के बारे में