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الضحى

Ad-Duhaa

The Morning Hours

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ अत्यंत कृपाशील, परम दयालु अल्लाह के नाम से
आयतें 11
पारा 30
पृष्ठ 596
प्रकार मक्की
अवतरण क्रम 11
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आयत: 1 / 11
1

وَٱلضُّحَىٰ

wal-ḍuḥā

कस़म है धूप चढ़ने के समय की!

2

وَٱلَّيْلِ إِذَا سَجَىٰ

wa-al-layli idhā sajā

और क़सम है रात की, जब वह छा जाए।

3

مَا وَدَّعَكَ رَبُّكَ وَمَا قَلَىٰ

mā waddaʿaka rabbuka wamā qalā

(ऐ नबी!) तेरे पालनहार ने तुझे न तो छोड़ा और न नाराज़ हुआ।

4

وَلَلْـَٔاخِرَةُ خَيْرٌۭ لَّكَ مِنَ ٱلْأُولَىٰ

walalākhiratu khayrun laka mina l-ūlā

और निश्चित रूप से आख़िरत आपके लिए दुनिया से बेहतर है।

5

وَلَسَوْفَ يُعْطِيكَ رَبُّكَ فَتَرْضَىٰٓ

walasawfa yuʿ'ṭīka rabbuka fatarḍā

और निश्चय तेरा पालनहार तुझे प्रदान करेगा, तो तू प्रसन्न हो जाएगा।

6

أَلَمْ يَجِدْكَ يَتِيمًۭا فَـَٔاوَىٰ

alam yajid'ka yatīman faāwā

क्या उसने आपको अनाथ पाकर शरण नहीं दी?

7

وَوَجَدَكَ ضَآلًّۭا فَهَدَىٰ

wawajadaka ḍāllan fahadā

और आपको मार्ग से अनभिज्ञ पाया, तो सीधा मार्ग दिखाया।

8

وَوَجَدَكَ عَآئِلًۭا فَأَغْنَىٰ

wawajadaka ʿāilan fa-aghnā

और उसने आपको निर्धन पाया, तो संपन्न कर दिया।

9

فَأَمَّا ٱلْيَتِيمَ فَلَا تَقْهَرْ

fa-ammā l-yatīma falā taqhar

अतः आप अनाथ पर कठोरता न दिखाएँ।1

10

وَأَمَّا ٱلسَّآئِلَ فَلَا تَنْهَرْ

wa-ammā l-sāila falā tanhar

और माँगने वाले को न झिड़कें।

11

وَأَمَّا بِنِعْمَةِ رَبِّكَ فَحَدِّثْ

wa-ammā biniʿ'mati rabbika faḥaddith

और अपने रब के उपकार का वर्णन करते रहें।1

इस सूरत के बारे में