55

الرحمن

Ar-Rahman

The Beneficent

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ अत्यंत कृपाशील, परम दयालु अल्लाह के नाम से
आयतें 78
पारा 27
पृष्ठ 531-534
प्रकार मदनी
अवतरण क्रम 97
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आयत: 1 / 78
1

ٱلرَّحْمَـٰنُ

al-raḥmānu

अत्यंत दयावान् ने।

2

عَلَّمَ ٱلْقُرْءَانَ

ʿallama l-qur'āna

यह क़ुरआन सिखाया।

3

خَلَقَ ٱلْإِنسَـٰنَ

khalaqa l-insāna

उसने मनुष्य को पैदा किया।

4

عَلَّمَهُ ٱلْبَيَانَ

ʿallamahu l-bayāna

उसे बात करना सिखाया।

5

ٱلشَّمْسُ وَٱلْقَمَرُ بِحُسْبَانٍۢ

al-shamsu wal-qamaru biḥus'bānin

सूर्य तथा चंद्रमा एक हिसाब से चल रहे हैं।

6

وَٱلنَّجْمُ وَٱلشَّجَرُ يَسْجُدَانِ

wal-najmu wal-shajaru yasjudāni

तथा बिना तने के पौधे और पेड़ सजदा करते हैं।

7

وَٱلسَّمَآءَ رَفَعَهَا وَوَضَعَ ٱلْمِيزَانَ

wal-samāa rafaʿahā wawaḍaʿa l-mīzāna

और उसने आकाश को ऊँचा किया और न्याय का संतुलन स्थापित किया।1

8

أَلَّا تَطْغَوْا۟ فِى ٱلْمِيزَانِ

allā taṭghaw fī l-mīzāni

ताकि तुम माप-तौल में अति न करो।

9

وَأَقِيمُوا۟ ٱلْوَزْنَ بِٱلْقِسْطِ وَلَا تُخْسِرُوا۟ ٱلْمِيزَانَ

wa-aqīmū l-wazna bil-qis'ṭi walā tukh'sirū l-mīzāna

तथा न्याय के साथ तौल को सीधा रखो और माप-तौल में कमी न करो।

10

وَٱلْأَرْضَ وَضَعَهَا لِلْأَنَامِ

wal-arḍa waḍaʿahā lil'anāmi

और उसने धरती को सृष्टि के लिए (रहने योग्य) बनाया।

11

فِيهَا فَـٰكِهَةٌۭ وَٱلنَّخْلُ ذَاتُ ٱلْأَكْمَامِ

fīhā fākihatun wal-nakhlu dhātu l-akmāmi

उसमें फल हैं, तथा आवरणों वाले खजूर के वृक्ष हैं।

12

وَٱلْحَبُّ ذُو ٱلْعَصْفِ وَٱلرَّيْحَانُ

wal-ḥabu dhū l-ʿaṣfi wal-rayḥānu

और भूसे वाले अन्न तथा सुगंधित पौधे हैं।

13

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

fabi-ayyi ālāi rabbikumā tukadhibāni

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

14

خَلَقَ ٱلْإِنسَـٰنَ مِن صَلْصَـٰلٍۢ كَٱلْفَخَّارِ

khalaqa l-insāna min ṣalṣālin kal-fakhāri

उसने मनुष्य को ठीकरी की तरह बजने वाली मिट्टी से पैदा किया।

15

وَخَلَقَ ٱلْجَآنَّ مِن مَّارِجٍۢ مِّن نَّارٍۢ

wakhalaqa l-jāna min mārijin min nārin

तथा जिन्नों को आग की ज्वाला से पैदा किया।

16

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

fabi-ayyi ālāi rabbikumā tukadhibāni

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

17

رَبُّ ٱلْمَشْرِقَيْنِ وَرَبُّ ٱلْمَغْرِبَيْنِ

rabbu l-mashriqayni warabbu l-maghribayni

(वह) सूर्योदय1 के दोनों स्थानों तथा सूर्यास्त के दोनों स्थानों का रब है।

18

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

fabi-ayyi ālāi rabbikumā tukadhibāni

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

19

مَرَجَ ٱلْبَحْرَيْنِ يَلْتَقِيَانِ

maraja l-baḥrayni yaltaqiyāni

उसने दो सागरों को मिला दिया, जो (देखने में) आपस में मिलते हैं।

20

بَيْنَهُمَا بَرْزَخٌۭ لَّا يَبْغِيَانِ

baynahumā barzakhun lā yabghiyāni

उन दोनों के बीच एक अवरोध है (जिससे) वे आगे नहीं बढ़ते।

21

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

fabi-ayyi ālāi rabbikumā tukadhibāni

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

22

يَخْرُجُ مِنْهُمَا ٱللُّؤْلُؤُ وَٱلْمَرْجَانُ

yakhruju min'humā l-lu'lu-u wal-marjānu

उन दोनों से मोती और मूँगा निकलते हैं।

23

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

fabi-ayyi ālāi rabbikumā tukadhibāni

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

24

وَلَهُ ٱلْجَوَارِ ٱلْمُنشَـَٔاتُ فِى ٱلْبَحْرِ كَٱلْأَعْلَـٰمِ

walahu l-jawāri l-munshaātu fī l-baḥri kal-aʿlāmi

तथा उसी के अधिकार में हैं समुद्र में चलने वाले पहाड़ों जैसे जहाज़।

25

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

fabi-ayyi ālāi rabbikumā tukadhibāni

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

26

كُلُّ مَنْ عَلَيْهَا فَانٍۢ

kullu man ʿalayhā fānin

हर कोई जो इस (धरती) पर है, नष्ट होने वाला है।

27

وَيَبْقَىٰ وَجْهُ رَبِّكَ ذُو ٱلْجَلَـٰلِ وَٱلْإِكْرَامِ

wayabqā wajhu rabbika dhū l-jalāli wal-ik'rāmi

तथा आपके पालनहार का चेहरा बाक़ी रहेगा, जो बड़ी महिमा और सम्मान वाला है।

28

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

fabi-ayyi ālāi rabbikumā tukadhibāni

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

29

يَسْـَٔلُهُۥ مَن فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۚ كُلَّ يَوْمٍ هُوَ فِى شَأْنٍۢ

yasaluhu man fī l-samāwāti wal-arḍi kulla yawmin huwa fī shanin

उसी से माँगता है, जो कोई आकाशों तथा धरती में है। वह प्रतिदिन एक (नए) कार्य में है।1

30

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

fabi-ayyi ālāi rabbikumā tukadhibāni

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

31

سَنَفْرُغُ لَكُمْ أَيُّهَ ٱلثَّقَلَانِ

sanafrughu lakum ayyuha l-thaqalāni

हम जल्द ही तुम्हारे लिए फ़ारिग़ होंगे1 ऐ दो भारी समूहो! (जिन्नो और इनसानो!)2

32

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

fabi-ayyi ālāi rabbikumā tukadhibāni

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

33

يَـٰمَعْشَرَ ٱلْجِنِّ وَٱلْإِنسِ إِنِ ٱسْتَطَعْتُمْ أَن تَنفُذُوا۟ مِنْ أَقْطَارِ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ فَٱنفُذُوا۟ ۚ لَا تَنفُذُونَ إِلَّا بِسُلْطَـٰنٍۢ

yāmaʿshara l-jini wal-insi ini is'taṭaʿtum an tanfudhū min aqṭāri l-samāwāti wal-arḍi fa-unfudhū lā tanfudhūna illā bisul'ṭānin

ऐ जिन्न तथा मनुष्य के समूह! यदि तुम आकाशों तथा धरती के किनारों से निकल सकते हो, तो निकल भागो, (परंतु) तुम शक्ति (प्रभुत्व) के बिना नहीं निकल सकोगे।1

34

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

fabi-ayyi ālāi rabbikumā tukadhibāni

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

35

يُرْسَلُ عَلَيْكُمَا شُوَاظٌۭ مِّن نَّارٍۢ وَنُحَاسٌۭ فَلَا تَنتَصِرَانِ

yur'salu ʿalaykumā shuwāẓun min nārin wanuḥāsun falā tantaṣirāni

तुम दोनों पर आग का ज्वाला तथा धुआँ छोड़ा जाएगा। फिर तुम अपने आपको बचा नहीं सकोगे।

36

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

fabi-ayyi ālāi rabbikumā tukadhibāni

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

37

فَإِذَا ٱنشَقَّتِ ٱلسَّمَآءُ فَكَانَتْ وَرْدَةًۭ كَٱلدِّهَانِ

fa-idhā inshaqqati l-samāu fakānat wardatan kal-dihāni

फिर जब आकाश फट जाएगा, तो वह तेल की तरह लाल हो जाएगा।

38

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

fabi-ayyi ālāi rabbikumā tukadhibāni

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

39

فَيَوْمَئِذٍۢ لَّا يُسْـَٔلُ عَن ذَنۢبِهِۦٓ إِنسٌۭ وَلَا جَآنٌّۭ

fayawma-idhin lā yus'alu ʿan dhanbihi insun walā jānnun

फिर उस दिन न किसी मनुष्य से उसके गुनाह के बारे में पूछा जाएगा और न किसी जिन्न से।

40

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

fabi-ayyi ālāi rabbikumā tukadhibāni

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

41

يُعْرَفُ ٱلْمُجْرِمُونَ بِسِيمَـٰهُمْ فَيُؤْخَذُ بِٱلنَّوَٰصِى وَٱلْأَقْدَامِ

yuʿ'rafu l-muj'rimūna bisīmāhum fayu'khadhu bil-nawāṣī wal-aqdāmi

अपराधियों की पहचान उनके चिह्नों से होगी, फिर माथे के बालों और पैरों से (उन्हें) पकड़ा जाएगा।

42

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

fabi-ayyi ālāi rabbikumā tukadhibāni

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

43

هَـٰذِهِۦ جَهَنَّمُ ٱلَّتِى يُكَذِّبُ بِهَا ٱلْمُجْرِمُونَ

hādhihi jahannamu allatī yukadhibu bihā l-muj'rimūna

यही है वह जहन्नम, जिसे अपराधी लोग झुठलाते थे।

44

يَطُوفُونَ بَيْنَهَا وَبَيْنَ حَمِيمٍ ءَانٍۢ

yaṭūfūna baynahā wabayna ḥamīmin ānin

वे उसके और खौलते हुए पानी के बीच चक्कर लगा रहे होंगे।

45

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

fabi-ayyi ālāi rabbikumā tukadhibāni

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

46

وَلِمَنْ خَافَ مَقَامَ رَبِّهِۦ جَنَّتَانِ

waliman khāfa maqāma rabbihi jannatāni

और जो व्यक्ति अपने पालनहार के समक्ष खड़े होने से डर गया, उसके लिए दो बाग़ हैं।

47

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

fabi-ayyi ālāi rabbikumā tukadhibāni

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

48

ذَوَاتَآ أَفْنَانٍۢ

dhawātā afnānin

दोनों बहुत शाखाओं वाले हैं।

49

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

fabi-ayyi ālāi rabbikumā tukadhibāni

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

50

فِيهِمَا عَيْنَانِ تَجْرِيَانِ

fīhimā ʿaynāni tajriyāni

उन दोनों में दो जल स्रोत बहते हैं।

51

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

fabi-ayyi ālāi rabbikumā tukadhibāni

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

52

فِيهِمَا مِن كُلِّ فَـٰكِهَةٍۢ زَوْجَانِ

fīhimā min kulli fākihatin zawjāni

उन दोनों में प्रत्येक फल के दो प्रकार हैं।

53

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

fabi-ayyi ālāi rabbikumā tukadhibāni

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

54

مُتَّكِـِٔينَ عَلَىٰ فُرُشٍۭ بَطَآئِنُهَا مِنْ إِسْتَبْرَقٍۢ ۚ وَجَنَى ٱلْجَنَّتَيْنِ دَانٍۢ

muttakiīna ʿalā furushin baṭāinuhā min is'tabraqin wajanā l-janatayni dānin

ऐसे बिस्तरों पर तकिए लगाए होंगे, जिनके स्तर मोटे रेशम के हैं और दोनों बाग़ों के फल निकट हैं।

55

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

fabi-ayyi ālāi rabbikumā tukadhibāni

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

56

فِيهِنَّ قَـٰصِرَٰتُ ٱلطَّرْفِ لَمْ يَطْمِثْهُنَّ إِنسٌۭ قَبْلَهُمْ وَلَا جَآنٌّۭ

fīhinna qāṣirātu l-ṭarfi lam yaṭmith'hunna insun qablahum walā jānnun

उनमें नीची निगाहों वाली औरतें हैं, जिन्हें उनसे पहले न किसी मनुष्य ने हाथ लगाया है और न किसी जिन्न ने।

57

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

fabi-ayyi ālāi rabbikumā tukadhibāni

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

58

كَأَنَّهُنَّ ٱلْيَاقُوتُ وَٱلْمَرْجَانُ

ka-annahunna l-yāqūtu wal-marjānu

मानो वे (स्त्रियाँ) माणिक और मूँगा हैं।

59

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

fabi-ayyi ālāi rabbikumā tukadhibāni

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

60

هَلْ جَزَآءُ ٱلْإِحْسَـٰنِ إِلَّا ٱلْإِحْسَـٰنُ

hal jazāu l-iḥ'sāni illā l-iḥ'sānu

एहसान का बदला एहसान के सिवा क्या है?

61

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

fabi-ayyi ālāi rabbikumā tukadhibāni

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

62

وَمِن دُونِهِمَا جَنَّتَانِ

wamin dūnihimā jannatāni

तथा इन दो (बाग़ों) के अलावा और दो बाग़ हैं।

63

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

fabi-ayyi ālāi rabbikumā tukadhibāni

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

64

مُدْهَآمَّتَانِ

mud'hāmmatāni

दोनों गहरे हरे रंग के हैं।

65

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

fabi-ayyi ālāi rabbikumā tukadhibāni

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

66

فِيهِمَا عَيْنَانِ نَضَّاخَتَانِ

fīhimā ʿaynāni naḍḍākhatāni

उन दोनों में जोश मारते हुए दो जल स्रोत हैं।

67

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

fabi-ayyi ālāi rabbikumā tukadhibāni

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

68

فِيهِمَا فَـٰكِهَةٌۭ وَنَخْلٌۭ وَرُمَّانٌۭ

fīhimā fākihatun wanakhlun warummānun

उन दोनों में फल तथा खजूर के पेड़ और अनार हैं।

69

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

fabi-ayyi ālāi rabbikumā tukadhibāni

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

70

فِيهِنَّ خَيْرَٰتٌ حِسَانٌۭ

fīhinna khayrātun ḥisānun

उनमें कई अच्छे व्यवहार वाली, खूबसूरत महिलाएं हैं।

71

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

fabi-ayyi ālāi rabbikumā tukadhibāni

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

72

حُورٌۭ مَّقْصُورَٰتٌۭ فِى ٱلْخِيَامِ

ḥūrun maqṣūrātun fī l-khiyāmi

हूरें (यानी गोरे बदन, काली आँखों वाली औरतें), जो खेमों में रोकी हुई हैं।

73

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

fabi-ayyi ālāi rabbikumā tukadhibāni

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

74

لَمْ يَطْمِثْهُنَّ إِنسٌۭ قَبْلَهُمْ وَلَا جَآنٌّۭ

lam yaṭmith'hunna insun qablahum walā jānnun

उनसे पहले न तो किसी मनुष्य ने उन्हें छुआ है और न ही किसी जिन्न ने।1

75

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

fabi-ayyi ālāi rabbikumā tukadhibāni

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

76

مُتَّكِـِٔينَ عَلَىٰ رَفْرَفٍ خُضْرٍۢ وَعَبْقَرِىٍّ حِسَانٍۢ

muttakiīna ʿalā rafrafin khuḍ'rin waʿabqariyyin ḥisānin

वे हरी और उत्कृष्ट एवं अति सुंदर क़ालीनों पर तकिया लगाए होंगे।

77

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

fabi-ayyi ālāi rabbikumā tukadhibāni

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

78

تَبَـٰرَكَ ٱسْمُ رَبِّكَ ذِى ٱلْجَلَـٰلِ وَٱلْإِكْرَامِ

tabāraka us'mu rabbika dhī l-jalāli wal-ik'rāmi

बहुत बरकत वाला है आपके पालनहार का नाम, जो बड़ी महिमा और सम्मान वाला है।

इस सूरत के बारे में