105

الفيل

Al-Fil

The Elephant

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ अत्यंत कृपाशील, परम दयालु अल्लाह के नाम से
आयतें 5
पारा 30
पृष्ठ 601
प्रकार मक्की
अवतरण क्रम 19
0:00 / 0:00
आयत: 1 / 5
1

أَلَمْ تَرَ كَيْفَ فَعَلَ رَبُّكَ بِأَصْحَـٰبِ ٱلْفِيلِ

alam tara kayfa faʿala rabbuka bi-aṣḥābi l-fīli

क्या तुमने नहीं देखा कि तुम्हारे पालनहार ने हाथी वालों के साथ किस तरह किया?

2

أَلَمْ يَجْعَلْ كَيْدَهُمْ فِى تَضْلِيلٍۢ

alam yajʿal kaydahum fī taḍlīlin

क्या उसने उनकी चाल को विफल नहीं कर दिया?

3

وَأَرْسَلَ عَلَيْهِمْ طَيْرًا أَبَابِيلَ

wa-arsala ʿalayhim ṭayran abābīla

और उनपर झुंड के झुंड पक्षी भेजे।

4

تَرْمِيهِم بِحِجَارَةٍۢ مِّن سِجِّيلٍۢ

tarmīhim biḥijāratin min sijjīlin

जो उनपर पकी हुई मिट्टी (खंगर) की कंकड़ियाँ फेंक रहे थे।

5

فَجَعَلَهُمْ كَعَصْفٍۢ مَّأْكُولٍۭ

fajaʿalahum kaʿaṣfin makūlin

तो उसने उन्हें खाए हुए भूसे की तरह कर दिया।1

इस सूरत के बारे में